वर्ष 2018 के अंत में हमारे प्रदेश छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। तीन पारी पूरी कर चुके सूबे के मुखिया डॉ रमन सिंह पूरी ताकत से चौका मारने की तैयारी कर रहे हैं और विपक्ष उनके विजय रथ को रोकने पूरी ताकत से अधूरे वादे, घोटालों की सूची और तमाम जोड़-तोड़ के साथ सरकार को घेरने कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
यह जीत दोनों दलों के लिये महत्वपूर्ण है। एक तरफ़ सबसे लंबे कार्यकाल वाले बीजेपी के मुख्यमंत्री बन चुके डॉ साहब की साख है तो दूसरी ओर 14बरस से सत्ता से दूर वनवास काट रहा विपक्ष। साल 2018 की शुरुआत से ही डॉ साहब कोरिया जिले से लेकर सुकमा जिले तक के दौरे कर रहे हैं कभी लोक सुराज के बहाने तो कभी विकास यात्रा के बहाने।
चुनावी वर्ष होने की वजह से सरकार और उनके नुमाइन्दे सुनियोजित तरीके से आमजनता के बीच जाना चाहते हैं। तो साल 2018 की शुरुआत लोक सुराज अभीयान के प्रथम चरण (12-14 जनवरी के बीच) में आमजनता से दिक्कतों, शिकायतों, समस्याओं के आवेदन मांगे गए। अब इन आवेदनों को इकट्ठा कौन करेगा? जिला प्रशासन।
लाखों की संख्या में आवेदन आए फ़िर जनवरी से मार्च तक चले द्वितीय चरण में आवेदनों का निपटारा करना था (कितनों का निपटारा हुआ? यह सवाल वैसा ही है जैसा भाग-दो आने से पूर्व था कि 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?'
पर धरातल की बात यह है कि शायद ही कोई आवेदनकर्ता मिलेगा जो कहे कि उसके आवेदन का निपटारा हो गया है।
इस बीच फरवरी माह में बजट सत्र आरंभ हुआ, जिसमें कम पढ़े-लिखे, अनपढ़, वाचाल और कुछ जिम्मेदार मंत्रियों से सदन में पूछे गए सवालों का उन्हें जवाब देना होता है। जवाब कहाँ से आएगा? विभागीय अधिकारी/कमर्चारी/जिला प्रशासन से। तो फरवरी में सराकरी अमला आंकड़े इकट्ठे करने और जवाब बनाने में व्यस्त था।
ऐसा करते हुए दो माह बीत गए। लोक सुराज के तृतीय चरण में डॉ साहब ने हेलीकॉप्टर निकलवाया और कहा स्वयं पन्द्रह दिनों तक औचक निरीक्षण करने निकलेंगे फिर किसी भी गांव/कस्बे/जिला मुख्यालय में उतर जाएंगे।
हालांकि सभी जानते हैं इसमें औचक जैसा कुछ होता नहीं है।यहाँ आवेदन मांगने से निपटारे तक हर चीज़ वैसे ही स्क्रिप्टेड है, जैसे हेलीकॉप्टर का फलाँ तारीख को फलाँ जगह उतरना। पर चुनावी वर्ष है जनता के सामने मुँहदिखाई तो जरूरी है, फिर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि की पीठ थपथपानी है, उम्मीदवारी हेतु टोह भी लेना है तो भाई भूमिका बांधनी पड़ती है ना और दो-चार को डांटना-डपकरना भी पड़ता है। तभी दिल्ली हाई कमांड से सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को 'जन-सम्पर्क यात्रा' निकालने का भी फ़रमान आ गया। इस प्रकार चुनावी वर्ष के तीन माह बीत गए।
इन सब के बीच दो वर्ग ऐसे हैं जो कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। साथ भटक रहे हैं, साथ जूझ रहे हैं। पहला वर्ग है सरकारी दफ़्तरों में काम करने वाले अधिकारियों/कमर्चारियों का। सुराज हो या यात्रा, हेलिकॉप्टर से हो या पैदल सारी की सारी "व्यवस्थाओं" का जिम्मा इस वर्ग के ही हिस्से ही आता हैं। तो वहीं दूसरा वर्ग कहलाता है "वोटर" जो राशन कार्ड बनवाने, जमीन रजिस्ट्री करवाने, नक्शा पास करवाने, साफ पानी मांगने उन्हीं सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। इस दूसरे वाले वर्ग की भूमिका नेताजी लोगों को केवल वोट डालने तक सीमित है इससे ज्यादा कुछ नहीं। वह जब नक्शा पास करने कहता है तो जवाब मिलता है, 'साहब सुराज में व्यस्त हैं'। वह जब साफ़ पानी मांगता है तब साहब या तो 'औचक निरीक्षण' में आए हेलीकॉप्टर की धूल खा रहे होते हैं या मंत्रीजी/विधायकजी की रैली में कदमताल करते भावी नेताओं के कोल्ड ड्रिंक, पानी की व्यवस्था में लगे होते हैं।
इस सरकारी दफ़्तर वाले अधिकारी/कर्मचारी और उनके चक्कर काटते "वोटर" की स्थिति अमूमन सभी राज्यों में एक समान होती है। जिसके हिस्से आता है धूल, मिट्टी, धूप, बारिश ठंड और हाथ जोड़े नेताजी की हंसी इससे इतर कुछ नहीं।
आज ज़रूरत है इन दोनों वर्गों को अपने अधिकारों को जानने, समझने की। कार्यपालिका को ज़रूरत है फ़िजूल के फर्जी आदेशों को 'ना' कहने की। अपने परिवार, दोस्तों, बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने जाने की क्योंकि मंत्रीजी वाली स्वतंत्रता इन्हें नहीं है कि 'शहर/गांव/कृषि/अधोसंरचना के विकास' को समझने ब्राज़ील, इज़राइल, दक्षिण अफ्रीका के चक्कर लगा आएं। इनके पास तो समय और आय दोनों सीमित है, उसमें भी डाका डाल देंगे तो कैसे चलेगा सर।
रही बात "वोटर" की तो इन्हें ज़रूरत है, इस "वोटर" मात्र के दर्जे से उठ कर उसके हक़ में आने वाली सुविधाओं को छाती ठोक कर मांगेने की। केवल यही तरीका है जिससे इन फ़िजूल की यात्राओं, निरीक्षणों की आड़ में बहाए जा रहे पैसों की बर्बादी और कार्यपालिका और जनता की ऊर्जा की बर्बादी को रोका जा सकता है।
सरकारें जिस भी दल की हों, ज़रूरत है इस ओर विचार करने की कि इसके पहले कि कोई हक़ के लिये खड़ा हो जाए या कोई मुँह पर ना कह दे खुद में सुधार ले आया जाए, क्योंकि
"अति सवर्त्र वर्जयेत"।
जाते-जाते एक जानकारी साझा करता जाऊं, कि मई माह की 12 तारीख़ से रमन सरकार प्रदेश भर का चक्कर लगाने "विकास यात्रा" की शुरुआत कर रही है।
"इति श्री चुनावी वर्ष कथा..."
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